ईरान ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों की दूरी पर खुद से लगाई गई 2,000 किलोमीटर की सीमा हटाने का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद ईरान की मिसाइलों की पहुंच पहले से कहीं ज्यादा बढ़ सकती है। अब यूरोप के बड़े हिस्से और अमेरिका के दूर-दराज के सैन्य ठिकाने भी इसकी जद में आ सकते हैं।
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रवक्ता मोहिब्बी ने कहा है कि अब ईरान अपनी मिसाइलों की दूरी को लेकर किसी भौगोलिक सीमा का पालन जरूरी नहीं समझता। उनका कहना है कि दुनिया के किसी भी हिस्से से अगर ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा होता है, तो उस जगह को निशाना बनाया जा सकता है।
बताया जा रहा है कि यह फैसला ईरान के सर्वोच्च नेता सैयद मुज्तबा खामेनेई के आदेश पर लिया गया है। उन्होंने सुरक्षा से जुड़े किसी भी खतरे का तुरंत जवाब देने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया था। साथ ही उन्होंने कहा था कि ईरान की सैन्य ताकत सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल भी किया जाना चाहिए।
लेकिन इस मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि अभी तक ईरान के पास 2,000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों की मौजूदगी की पक्की पुष्टि नहीं हुई है।
हालांकि, खुर्रमशहर मिसाइल की मारक क्षमता को लेकर पहले से चर्चा होती रही है। मार्च 2026 में डिएगो गार्सिया स्थित अमेरिका और ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य ठिकाने की ओर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने की खबर भी सामने आई थी। यह ठिकाना ईरान से करीब 4,000 किलोमीटर दूर है। ब्रिटेन ने मिसाइल हमले की कोशिश की पुष्टि की थी, जबकि ईरान ने इसमें अपनी भूमिका से इनकार किया था। खबरों के मुताबिक, एक मिसाइल लक्ष्य तक नहीं पहुंची और दूसरी को रोक लिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि ईरान अपनी मिसाइल क्षमता को लेकर पहले से ज्यादा आक्रामक रुख अपना रहा है। हालांकि, मिसाइलों की वास्तविक मारक दूरी कितनी है और क्या ईरान के पास 2,000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक हमला करने वाली मिसाइलें मौजूद हैं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईरान अपने इस नए ऐलान को किस तरह अमल में लाता है और इससे मध्य पूर्व के साथ-साथ यूरोप और अमेरिका की सुरक्षा पर क्या असर पड़ता है।
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